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लौह तत्व से भरी देश भर में मशहूर है पहाड़ की कंडाली की कापली

Kandali Kapali

प्रकृति एक ऐसी चीज है, जिससे हमें कई तरह के फायदे होते है। चाहे प्राकृतिक हवा, पानी हो या साक-सब्जियां प्रकृति से मिली हर वस्तु हमारे लिए स्वास्थवर्धक होती है। इन्हीं प्राकृतिक वस्तुओ से भरा है। हमारा उत्तराखंड जहां पर जल, हवा, साक-सब्जियां सब प्रकृति से मिलता है और यह हमारे शरीर के लिए भी उचित होती है। इनसे कई बिमारियों का नाश होता है। अगर साक सब्जियों की बात करे तो इसमें एक नाम कंडाली का आता है।

Kandali Kapali

अच्छी सेहत के लिए पहाड़ी खाना है मददगार

कुमांऊ व गढ़वाल में कंडाली को काल्डी आला व सिसौण आदि कई नामों से जाना जाता है। हिंदी में इसे बिच्छू घास या बिच्छू बूटी कहते हैं, बिच्छू घास नाम सुनकर आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे और सचमुच शरीर के किसी अंग को यदि कंडाली छू गयी तो अगले दो दिन तक उस जगह पर झनझनाहट रहेगी। स्कूली समय में इस कंडाली से मार भी बहुत खायी होगी, लेकिन इसी कंडाली के घास का जब साग बनाया जाता है तो वो लज्जक और टेस्टी होता है। गढ़वाल के अधिकांश घरों में आज भी कंडाली का साग खूब बनता है। लेकिन गांवों से पलायन होने के बाद ज़्यादातर परिवार शहरों और छोटे कस्बों में बस गए हैं। शहरों में रह रहे लोगों को मुश्किल से ही गढ़वाली व्यंजन या कंडाली का साग खाने को मिलते होंगे जबकि अधिकांश लोगों की हसरत होती है कि वो कंडाली का साग जैसा व्यंजन हर समय खाने को मिले, शहर में तो यह थोडा मुश्क़िल होता है। लेकिन कभी गांव जाना हुआ तो आप कंडाली को अपने साथ लाकर कुछ दिन इसका लुफ़्त उठा सकते हैं।

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कंडाली में लौह तत्व अधिक मात्रा में पाया जाता है और ये खून की कमी को भी पूरा करता है। इसके अलावा फोरमिक ऐसिड, एसटिल कोलाइट, विटामिन ए भी कंडाली में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसमें चंडी तत्व भी पाया जाता है, गैस नाशक है और आसानी से पच जाता है। कंडाली का खानपान पीलिया, पांडू, उदार रोग, खांसी, जुकाम, बलगम, गठिया रोग, चर्बी कम करने में सहायक है। इसके अलावा स्त्री रोग, किडनी अनीमिया, साइटिका हाथ पाँव में मोच आने पर कंडाली रक्त संचारण का काम करती है। कंडाली कैंसर रोधी है, इसके बीजों से कैंसर की दवाई भी बन रही है। एलर्जी खत्म करने में यह रामबाण औषधि है, कंडाली की पतियों को सुखाकर हर्बल चाय तैयार की जाती है। कंडाली के डंठलों का इस्तेमाल नहाने के साबुन में होता है व छाल के रेशे की टोपी मानसिक संतुलन के लिए उपयोगी है। कंडाली को उबाल कर नमक मिर्च व मसाला मिलकर सूप के रूप में पी सकते हैं।

Kandali Kapali

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कंडाली के मुलायम डंठल की बाहरी छाल निकालने के बाद डंठल से बच्चों व बड़ों के लिए एनिमा का काम लिया जा सकता है। अगर आपके शरीर के किसी हिस्से में मोच आ गई है, तो इसकी पत्तियों के इस्तेमाल से अर्क बनाकर प्रभाविक जगह पर लगा सकते हैं। इससे आपको जल्द ही आराम मिलेगा और इसके साथ ही अगर आपके शरीर में जकड़न महसूस हो रही है, तो इसका साग बनाकर खाएं।

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Hilly Wood

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